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श्रीमद भगवद पुराण * बाईसवाँ अध्याय *[स्कंध४] ( सनकादिक का पृथु को उपदेश )

  धर्म कथाएं विषय सूची [श्रीमद भागवद पुराण] श्रीमद भागवद पुराण [introduction] • श्रीमद भागवद पुराण [मंगला चरण] श्रीमद भागवद पुराण [स्कंध १] •  श्रीमद भागवद पुराण [स्कंध २] •  श्रीमद भागवद पुराण [स्कंध ३] श्रीमद भागवद पुराण [स्कंध ४] जय माता दी जी🙏 माये नी तेरा सुनेया ऐ दिल दरिया माये नी तेरा सुनेया ऐ दिल दरिया वास्ताई साडी, हो वास्ताई साडी  वास्ताई साडी अर्जी ते गौर फरमा माये नी तेरा सुनेया ऐ दिल दरिया.....2 साडा हाल लवेंगी जे पूछ माँ तैनु फर्क पवेगा ना कुछ माँ जिदा सारेया नु पाले दुख सारेया दे टाले ओदा साडे दर्द मिटा माये नी तेरा सुनेया ऐ दिल दरिया.....2 कोई ते चारा कर एस पासे आउण दा ऐ कोई वेला नहियो मंदरा च सोउण दा जींद साडी तू रुलाई जे तू सुनी ना दुहाई तेरी ममता नु की हो गया माये नी तेरा सुनेया ऐ दिल दरिया.....2 तेरी देर नाल पै गया हनेर माँ सानु लया ऐ मुसीबतां ने घेर माँ माये निर्दोष प्यार सानु देके ईक वार बेड़ी सबदी तू डूबदी नु तार माये नी तेरा सुनेया ऐ दिल दरिया.....2 माये नी तेरा सुनेया ऐ दिल दरिया वास्ताई साडी अर्जी ते गौर फरमा माये नी तेरा सुनेया ऐ दिल द...

Shree ram ki kavita, kahani (chaand ko hai ram se shikayat)

धर्म कथाएं विषय सूची [श्रीमद भागवद पुराण] श्रीमद भागवद पुराण [introduction] •  श्रीमद भागवद पुराण [मंगला चरण] श्रीमद भागवद पुराण [स्कंध १] •  श्रीमद भागवद पुराण [स्कंध २] •  श्रीमद भागवद पुराण [स्कंध ३] श्रीमद भागवद पुराण [स्कंध ४] *चाँद को भगवान् राम से यह शिकायत है कि दीपवली का त्यौहार अमावस की रात में मनाया जाता है और क्योंकि अमावस की रात में चाँद निकलता ही नहीं है इसलिए वह कभी भी दीपावली मना नहीं* *सकता। यह एक मधुर कविता है कि चाँद किस प्रकार खुद को राम के हर कार्य से जोड़ लेता है और फिर राम से शिकायत करता है* *और राम भी उस की बात से* *सहमत हो कर उसे वरदान दे* *बैठते हैं आइये देखते हैं ।*   *जब चाँद का धीरज छूट गया ।*   *वह रघुनन्दन से रूठ गया ।*   *बोला रात को आलोकित हम ही ने करा है ।*   *स्वयं शिव ने हमें अपने सिर पे धरा है ।* *तुमने भी तो उपयोग किया हमारा है ।*   *हमारी ही चांदनी में सिया को निहारा है ।*   *सीता के रूप को हम ही ने सँवारा है ।*   *चाँद के तुल्य उनका मुखड़ा निखारा है ।* *जिस वक़्त ...

भारत के विभिन्न जगहों में भगवान का विस्तृत पूजन विधि [भाग २]

  श्रीमद भागवद पुराण उन्नीसवाँ अध्याय * स्कंध५ भारत वर्ष का श्रेष्टत्व वर्णन दो: हो भारत देश महान है, कहुँ सकल प्रस्तार। या उन्नाव अध्याय में, वर्णित कियौ विचार।। श्री शुकदेव जी बोले-हे राजा परीक्षित! इसी प्रकार किम्पुरुष खंड में श्री रामचंद्र जी विराजमान हैं । उनके चरणों की सेवा हनुमान जी करते हैं और अनेक प्रकार से गुणों का बखान करके पूजा किया करते हैं। इसी प्रकार भारत खंड में नर नारायण भगवान देवता स्वरूप बद्रिकाश्रम में विराजमान हैं, और नारद जी इन भगवान की उपासना करते हैं । श्री शुकदेव जी परीक्षित से कहते हैं-हे राजन ! कितने एक विद्वान इस जंबू द्वीप के आठ उपखंड भी कहते हैं। उनका मत है कि जब राजा सगर के साठ हजार पुत्र यज्ञ के घोड़े को ढूंढ़ने निकले तो उन्होंने इस पृथ्वी को चारों ओर से खोदा था, सो उसके कारण यह आठ उपद्वीप हुये जिनके नाम १-स्वर्णप्रस्थ, २-चन्द्रप्रस्थ, ३-आवर्तन, ४-रमणक, ५-मंद हरिण, ६-पांचजन्य, ७-सिंहल, ८-लंका ये हैं। Also read @ https://shrimadbhagwadmahapuran.blogspot.com/2020/08/blog-post_24.html