विषय सूची [श्रीमद भागवद पुराण] श्रीमद भागवद पुराण [introduction] • श्रीमद भागवद पुराण [मंगला चरण] श्रीमद भागवद पुराण [स्कंध १] • श्रीमद भागवद पुराण [स्कंध २] • श्रीमद भागवद पुराण [स्कंध ३] श्रीमद भागवद पुराण [स्कंध ४] श्रीमद भागवद पुराण [स्कंध ५] श्रीमद भागवद पुराण स्कंध ६ नवीन सुख सागर श्रीमद भागवद पुराण -छठवाँ स्कन्ध प्रारम्भ * मंगला चरण * दो० नारायण के नाम को जो सुमिरे एक वार। पाप क्षीण हो क्षणक में, हो भव सागर पार ॥ नर देही धारण करो, लियो न हरि को नाम | रे मन मूरख किस तरह, चाहँ तू हरि धाम || या छटवे स्कंध में, हैं उन्नीस अध्याय । पढ़े भक्त जन प्रेम से, प्रभु पद ध्यान लगाय ।। प्रथम अध्याय(अजामिल की मोक्ष वर्णन विषय) दो०- विष्णु पार्षद आयट, लिये यम दूत दबाय | दुष्ट अजामिल को लियौ, प्रथम अध्याय छुड़ाय || शुकदेव जी के बचन सुन परीक्षत ने विनय करके कहा हे मुने ! मेरे सामने आप उन उपायों का वर्णन करो कि जिनके करने से मनुष्य उन अनेक उग्र पीड़ा पहुँचाने वाले नरकों को प्राप्त न होवे । श्री शुकदेवजी बोले-हे राजा परीक्षत ! चाहे कोई भी मनुष्य क्यों न हो वह इस लोक में अगर मन, ...
श्रीमद भागवद पुराण, श्री वेद व्यास जी द्वारा रचित एक मुख्य ग्रंथ है।ॐसम्पूर्ण ज्ञान, सम्पूर्ण विवरण॥ इस ग्रंथ की रचना केवल ४ श्लोकों से की ग्यी है, जिसका मुख्य लक्ष्य केवल, कलयुग के घोर पापों से दूर ले जाकर मनुष्य को ज्ञान के मार्ग तक पहुचाना है। क्यूँकि कलयुग में मनुष्य की आयु क्षीण होने के कारण, पूर्ण वेदों का ज्ञानार्जन करना सम्भव नही है इसी कारण इन्हीं लक्षणों को जान कर श्रीवेद व्यास जी ने नारद मुनी के कहने पर इसका निर्माण किया ताकि रोगी, पापी, इत्यादी, सभी इसका लाभ उठा सकें।