विषय सूची [श्रीमद भागवद पुराण] श्रीमद भागवद पुराण [introduction] • श्रीमद भागवद पुराण [मंगला चरण] श्रीमद भागवद पुराण [स्कंध १] • श्रीमद भागवद पुराण [स्कंध २] • श्रीमद भागवद पुराण [स्कंध ३] श्रीमद भागवद पुराण [स्कंध ४] श्रीमद भागवद पुराण [स्कंध ५] श्रीमद भागवद पुराण स्कंध ६ नवीन सुख सागर श्रीमद भागवद पुराण छटवाँ अध्याय [स्कंध ६] ( दक्ष कन्याओं का वशं वर्णन ) दो॰ दिति सुत सों उत्पन्न भयौ, विश्वरूप सुकुमार। वरनौ या अध्याय में, दक्ष वंश विस्तार॥ श्री शुकदेव जी बोले-हे परीक्षत ! तत्पश्चात प्रजापति दक्ष ने बृह्मा जी की आज्ञानुसार अपनी भार्या अक्सिनी में साठ कन्यायें उत्पन्न की। जिसमें से दक्ष ने दस कन्याओं का विवाह धर्म से किया, और तेरह कन्याए कश्यप जो को विवाह दीं, तथा सत्ताईस कन्यायें चन्द्रमा जी को विवाह दीं, और भूत नाम के ऋषि अंगिरा व कृशाश्व को दो-दो कन्यायें विवाह दीं , तथा शेष चार कन्यायें तार्क्ष्य नाम ऋषि को दान करदीं । हे परीक्षत ! धर्म की ये दश स्त्रियां थी, १-भानु, २-लंबा, ३-ककुभ, ४-जांभि, ५-मिश्वा, ६-साध्या ७-मरुत्वती, ८-बसु, ९-महूर्त्ता, १०‐संकल्प...
श्रीमद भागवद पुराण, श्री वेद व्यास जी द्वारा रचित एक मुख्य ग्रंथ है।ॐसम्पूर्ण ज्ञान, सम्पूर्ण विवरण॥ इस ग्रंथ की रचना केवल ४ श्लोकों से की ग्यी है, जिसका मुख्य लक्ष्य केवल, कलयुग के घोर पापों से दूर ले जाकर मनुष्य को ज्ञान के मार्ग तक पहुचाना है। क्यूँकि कलयुग में मनुष्य की आयु क्षीण होने के कारण, पूर्ण वेदों का ज्ञानार्जन करना सम्भव नही है इसी कारण इन्हीं लक्षणों को जान कर श्रीवेद व्यास जी ने नारद मुनी के कहने पर इसका निर्माण किया ताकि रोगी, पापी, इत्यादी, सभी इसका लाभ उठा सकें।